अपने परिवारों के साथ

जसमीन सिद्धार्थ

आपको सादर आमंत्रित करते हैं

शनिवार · २१ नवंबर २०२६

बठिंडा, पंजाब

हमारे उत्सव

अपने परिवारों के आशीर्वाद से

जसमीन कौर सिद्धू

सुपुत्री

सरदार निर्मल सिंह सिद्धू एवं सरदारनी हरप्रीत कौर

पौत्री

सरदार दलबारा सिंह सिद्धू एवं स्व. सरदारनी अंगरेज कौर

सिद्धार्थ कुमार सिंह

सुपुत्र

स्व. डॉ. रंजन कुमार सिंह एवं श्रीमती कोमल कुमारी

पौत्र

स्व. श्री राजदेव सिंह एवं स्व. श्रीमती सुंदरी देवी

विवाह में शेष समय

–दिन
–घंटे
–मिनट
–सेकंड

हमारे उत्सव

हमारा विवाह दो परंपराओं को साथ लाता है — एक पंजाबी सिख परिवार और एक हिंदू परिवार — और चार दिनों में आप दोनों की रीतियाँ देखेंगे। यदि इनमें से कुछ आपके लिए नया हो, तो चिंता न करें। यहाँ एक संक्षिप्त परिचय है, ताकि सभी इसमें सम्मिलित हो सकें।

दो परिवार

एक उत्सव, दो परंपराएँ

जसमीन का परिवार बठिंडा का पंजाबी सिख परिवार है; सिद्धार्थ का परिवार पटना का हिंदू परिवार। दोनों में से किसी एक को चुनने के बजाय हमने दोनों की रीतियाँ निभाने का निर्णय लिया — इसीलिए आने वाले दिनों में गुरुद्वारे का संस्कार भी होगा और पवित्र अग्नि भी, मेहंदी भी और साफ़ा भी, ढोल भी और मंत्र भी।

पंजाबी सिख रीतियाँ

मेहंदी, वटना, जागो और आनंद कारज

विवाह से पहले के दिन वधू के घर के होते हैं — हाथों पर मेहंदी, परिवार द्वारा आशीर्वाद स्वरूप लगाया जाने वाला हल्दी का उबटन जिसे वटना कहते हैं, और जागो — ढोल और नृत्य से भरी एक रात। विवाह स्वयं आनंद कारज है, जो गुरुद्वारे में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की उपस्थिति में सम्पन्न होता है।

हिंदू रीतियाँ

लगन, हल्दी, बारात और फेरे

इसकी शुरुआत कुछ दिन पहले सिद्धार्थ के गया स्थित घर से होती है, जहाँ लगन से लेकर हल्दी तक की रस्में होती हैं। वर अपनी बारात के साथ आता है — परिवार और मित्रों का जुलूस, जिसका स्वागत संगीत और मालाओं से होता है। इसके बाद फेरे होते हैं — पवित्र अग्नि के चारों ओर लिए गए वे चक्कर, जिनमें से हर एक एक वचन है। यही वह क्षण है जब हिंदू विवाह पूर्ण होता है।

आप सब में सम्मिलित हैं

कृपया शामिल हों

इनमें भाग लेने के लिए रीतियों को जानना आवश्यक नहीं। किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी, और कोई न कोई आपको बताने के लिए सदा तत्पर रहेगा। जिन दिनों आ सकें, अवश्य आएँ — हर आयोजन के साथ पहनावे का सुझाव दिया गया है, और जहाँ कुछ आवश्यक है वहाँ सूचना भी, जैसे गुरुद्वारे में सिर ढँकना।

कार्यक्रम

पंजाब में आपके साथ इस उत्सव को मनाने के लिए हम बहुत उत्साहित हैं। यहाँ हर आयोजन का परिचय और पहनावे का सुझाव दिया गया है।

बुधवार · १८ नवंबर २०२६

मेहंदी

शाम ४:००

घर पर

बल्लुआना, बठिंडा, पंजाब

संगीत, उल्लास और पारंपरिक मेहंदी की एक संध्या।

पहनावा

हरा

वधू पक्ष

लगन, घृतधारी, देव पूजन, मंडपाच्छादन और हल्दी

सुबह १०:०० से

घर पर

गया, बिहार

सिद्धार्थ के गया स्थित घर में दिन भर पारिवारिक रस्में — शुभ मुहूर्त का निश्चय, बड़ों और पूर्वजों से आशीर्वाद, और कुलदेवता का पूजन। रात्रि में बाँस, केले के तने और आम के पत्तों से मंडप सजता है, और उसी में हल्दी होती है — हल्दी, गीत, और दिन का वह हिस्सा जिसमें सब शामिल होते हैं।

वर पक्ष

गुरुवार · १९ नवंबर २०२६

वटना

शाम ४:००

घर पर

बल्लुआना, बठिंडा, पंजाब

विवाह से पहले की एक पारंपरिक पंजाबी रस्म, जिसमें वधू को हल्दी, सरसों के तेल और आटे या बेसन का उबटन लगाया जाता है।

पहनावा

पीला

वधू पक्ष

जागो

रात ९:००

घर पर

बल्लुआना, बठिंडा, पंजाब

पंजाबी संस्कृति में विवाह से पहले का एक जोशीला और उल्लास से भरा उत्सव, जिसमें परिवार के लोग गाते-नाचते हैं और आने वाले विवाह का निमंत्रण देने के लिए प्रतीकात्मक रूप से मोहल्ले को “जगाते” हैं।

पहनावा

महिलाएँ पंजाबी घाघरा, या कोई अन्य पारंपरिक पंजाबी परिधान।

पुरुष पारंपरिक पंजाबी परिधान का स्वागत है।

वधू पक्ष

शुक्रवार · २० नवंबर २०२६

बठिंडा आगमन

दोपहर

होटल कम्फर्ट इन ट्यूलिप

बठिंडा, पंजाब

बारात बठिंडा पहुँचेगी। वर पक्ष के अतिथि यहीं ठहरेंगे, और दोपहर तथा रात्रि का भोजन होटल में ही रहेगा।

वर पक्ष

शनिवार · २१ नवंबर २०२६

आनंद कारज

सुबह १०:००

गुरुद्वारा साहिब बीबीवाला

बठिंडा, पंजाब

पंजाबी सिख विवाह संस्कार, जिसमें हम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हज़ूरी में, परिवार और प्रियजनों के बीच वचन लेते हैं।

पहनावा

महिलाएँ दुपट्टे के साथ कुर्ती — दुपट्टा अनिवार्य है। क्रॉप टॉप या चोली नहीं। नीचे सलवार, शरारा, पलाज़ो या लहंगा पहन सकते हैं।

पुरुष पारंपरिक पंजाबी परिधान का स्वागत है। गुरुद्वारे के भीतर सिर ढँकना अनिवार्य है, और पंजाबी पग का हार्दिक स्वागत है।

दोनों परिवार

बारात स्वागत एवं दोपहर भोज

सुबह ११:००

होटल सेपल

बठिंडा, पंजाब

वर के आगमन, उत्सव और दोनों परिवारों के साथ दोपहर के भोज में सम्मिलित हों।

पहनावा

उत्सव या सुरुचिपूर्ण परिधान — आपकी पसंद।

दोनों परिवार

रात्रि भोज एवं फेरे

शाम ७:००

होटल सेपल

बठिंडा, पंजाब

रात्रि भोज के साथ एक संध्या, उसके बाद हिंदू विवाह की रस्में — फेरे, सिंदूर दान, कन्या दान और विदाई।

पहनावा

उत्सव या सुरुचिपूर्ण परिधान — आपकी पसंद।

पुरुष यदि आप चाहें तो साफ़ा (पारंपरिक हिंदू पगड़ी) पहन सकते हैं।

दोनों परिवार

आर.एस.वी.पी.

यदि आप हमारे साथ होंगे तो हमें बहुत गर्व होगा — कृपया नीचे अपनी उपस्थिति सूचित करें।

कृपया १० नवंबर २०२६ तक उत्तर दें

ईमेल या फ़ोन — इनमें से कोई एक पर्याप्त है।

क्या आप हमारे साथ होंगे?
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